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गरीबी से बदहाल, यह वर्ल्ड कप के स्टार क्रिकेटर भैस चरा कर भर रहे है अपने परिवार का पेट

इंसना के बुरे हालात और गरीबी उस से किसी भी हद तक गुरा सकती हैं ,लेकिन हर कोई ये ही चाहता हैं की वे अपने परिवार को सारी खुशिया दे |भालाजी डामोर को जब देश के प्रतिनिधित्व के लिए चुना गया तोह उन्हें लगा क इसके बाद से उनकी ज़िन्दगी बदल जाएगी|

आज कल के नो जवान इसी वजह से दिन रात म्हणत करते हैं की एक ना के दिन उन्हें अपने ष्देश के लिए खलें का मौका मिलेगा और जब ये मौका भालाजी डामोरन को मिला तो वह फूले ना समाये उन की खुशिया का कोई ठिकाना नहीं था |लेकिन उन्हें क्या पता था के देश ले लिए अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी उन्हें आखिर में भैस को चारा चरा के पेट भरना पड़ेगा |

1998 के विश्वकप में यह ऑलराउंडर टुर्नामेंट के हीरो रहे। वह विश्व कप दृष्टिबाधित खिलाड़ियों का था. इस खिलाड़ी के अचे प्रदर्शन के कारण भारत सेमी-फाइनल में पहुंच सका था।

गुजरात के रहने वाले हैं

आप को बता दे की भालाजी डामोरन एक किसान परिवार से तालुक रखते हैं यह एक अंधे क्रिकेटर है जो की गुजरात के रहे वाले हैं |

बहुत ही शानदार रिकॉर्ड रहे हैं

38 वर्षीय क्रिकेटर का रिकॉर्ड बेहद शानदार है. भारत की तरफ से सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड इनके नाम पे है.

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